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समाजवाद के प्रखर नेता थे डॉ राम मनोहर लोहिया : जदयू

Politics 23-Mar-2023   9461
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नालंदा : नालंदा जिला जनता दल यूनाइटेड के द्वारा जिला कार्यालय अस्पताल चौक में 113 वीं जयंती मनाई गई। कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया।इस अवसर पर जनता दल यूनाइटेड के जिलाध्यक्ष मो अरशद मुख्य प्रवक्ता डा धनंजय कु देव बिहारशरीफ नगर जिला जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष गुलरेज अंसारी ने कहा कि राममनोहर लोहिया ने अपनी प्रखर देशभक्ति और तेजस्‍वी समाजवादी विचारों के कारण अपने समर्थकों के साथ ही अपने विरोधियों के मध्‍य भी अपार सम्मान हासिल किया। देश की राजनीति में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान और स्वतंत्रता के बाद ऐसे कई नेता हुए जिन्होंने अपने दम पर शासन का रुख बदल दिया जिनमें से एक थे राममनोहर लोहिया। अगर जयप्रकाश नारायण ने देश की राजनीति को स्वतंत्रता के बाद बदला तो वहीं राममनोहर लोहिया ने देश की राजनीति में भावी बदलाव की बयार आजादी से पहले ही ला दी थी।डॉ. लोहिया मानव की स्थापना के पक्षधर समाजवादी थे। वह समाजवादी भी इस अर्थ में थे कि, समाज ही उनका कार्यक्षेत्र था और वह अपने कार्यक्षेत्र को जनमंगल की अनुभूतियों से महकाना चाहते थे। वह चाहते थे कि व्यक्ति-व्यक्ति के बीच कोई भेद, कोई दुराव और कोई दीवार न रहे। सब जन समान हो, सब जन का मंगल हो। उन्होंने सदा ही विश्व-नागरिकता का सपना देखा था। वह मानव-मात्र को किसी देश का नहीं बल्कि विश्व का नागरिक मानते थे। जनता को वह जनतंत्र का निर्णायक मानते थे। डॉ. लोहिया अक्सर यह कहा करते थे कि उन पर केवल ढाई आदमियों का प्रभाव रहा, एक मार्क्‍स का, दूसरे गांधी का और आधा जवाहरलाल नेहरू का।

स्वतंत्र भारत की राजनीति और चिंतन धारा पर जिन गिने-चुने लोगों के व्यक्तित्व का गहरा असर हुआ है, उनमें डॉ. राममनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण प्रमुख रहे हैं। भारत के स्वतंत्रता युद्ध के आखिरी दौर में दोनों की भूमिका बड़ी महत्वपूर्ण रही है। 1933 में मद्रास पहुंचने पर लोहिया गांधीजी के साथ मिलकर देश को आजाद कराने की लड़ाई में शामिल हो गए। इसमें उन्होंने विधिवत रूप से समाजवादी आंदोलन की भावी रूपरेखा पेश की। सन् 1935 में उस समय कांग्रेस के अध्‍यक्ष रहे पंडित नेहरू ने लोहिया को कांग्रेस का महासचिव नियुक्‍त किया।जदयू के प्रदेश महासचिव मो अशगर शमीम एवं प्रदेश सचिव महमूद बख्खो ने कहा कि डॉ. लोहिया मानव की स्थापना के पक्षधर समाजवादी थे। वह समाजवादी भी इस अर्थ में थे कि, समाज ही उनका कार्यक्षेत्र था और वह अपने कार्यक्षेत्र को जनमंगल की अनुभूतियों से महकाना चाहते थे। वह चाहते थे कि व्यक्ति-व्यक्ति के बीच कोई भेद,कोई दुराव और कोई दीवार न रहे। सब जन समान हो,सब जन का मंगल हो। इस अवसर पर बनारस प्रसाद सिन्हा अरविंद कुमार ई अजय पटेल प्रो प्रविंद्र कुमार अमजद सिद्दीकी कुमार मंगलम त्रिनयन कुमार सुरेश प्रसाद शशि भूषण प्रसाद ई अली अहमद शशिकांत कुमार टोनी इमरान रिजवी सकिबुल हसन एहतेशाम मलिक सुवेंद्र राजवंशी सुरेंद्र पासवान मेराजुद्दीन जयराम पासवान चुन्नू मलिक बबलू सिंह अंकित कुमार सोनू पटेल जितेंद्र गिरीश प्रसाद अमित कुमार नीरज भारती आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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