30 साल के अनुभव वाले अंतरराष्ट्रीय अंपायर ने बताईं हॉकी अंपायरिंग की बारीकियां, बिहार के खेल भविष्य को बताया उज्ज्वल
Rajgir : मैदान पर खिलाड़ियों के हर मूव पर पैनी नजर, नियमों की गहरी समझ और हर फैसले में निष्पक्षता। हॉकी में एक अंपायर की भूमिका सिर्फ खेल खिलाने तक सीमित नहीं होती। यह सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि एक जुनून है। यह कहना है अंतरराष्ट्रीय हॉकी अंपायर रिपुदमन शर्मा का, जो पिछले 30 सालों से इस क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
पंजाब पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत शर्मा, राजगीर में चल रहे एशिया कप में बतौर अंपायर मैनेजर अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
कैसे होती है अंपायरों की चयन प्रक्रिया
रिपुदमन शर्मा ने बताया कि एक अंतरराष्ट्रीय अंपायर बनना एक कठिन प्रक्रिया है। इसके लिए सैकड़ों अंपायरों को ऑनलाइन लिखित परीक्षा, फिटनेस टेस्ट और प्रैक्टिकल से गुजरना पड़ता है। उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 25 अंतरराष्ट्रीय स्तर के अंपायर हैं, जिनमें से ज्यादातर पंजाब से हैं। एक अच्छे अंपायर को घरेलू, राष्ट्रीय और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंटों में खुद को साबित करना होता है।
खेल और अंपायरिंग अलग-अलग
उन्होंने एक दिलचस्प बात बताई कि ज्यादातर सफल अंपायर पेशेवर खिलाड़ी नहीं होते, क्योंकि हॉकी में युवा अंपायरों की जरूरत होती है। उन्होंने हांगकांग के टोनी च्युंग का उदाहरण दिया, जो एक बिजनेसमैन हैं लेकिन जुनून के कारण अंपायरिंग करते हैं।
बिहार का भविष्य उज्ज्वल
राजगीर के माहौल और व्यवस्था से प्रभावित शर्मा ने कहा कि यहां का माहौल बहुत अच्छा है और दर्शक भी खेल का पूरा आनंद ले रहे हैं। बिहार सरकार जिस तरह से खेलों को बढ़ावा दे रही है, उससे निश्चित रूप से भविष्य में यहां से भी अच्छे खिलाड़ी और अंपायर निकलेंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि आसपास के गांवों के बच्चों को हॉकी खेलने के लिए प्रेरित करना चाहिए। उन्हें हॉकी स्टिक और मैदान जैसी सुविधाएं दी जाएं, तो सैकड़ों बच्चों में से कुछ हीरे जरूर देश के लिए निकलेंगे।
उन्होंने बिहार की सड़कों की भी तारीफ करते हुए कहा कि अच्छी सड़कों की वजह से सफर का समय काफी कम हो गया है। साथ ही, उन्होंने युवा खिलाड़ियों को खेल के साथ-साथ पढ़ाई और कम्युनिकेशन स्किल (संवाद कौशल) पर भी ध्यान देने की सलाह दी।

