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आज प्रथम सोमवारी को बाबा सोमनाथ सिद्धनाथ की जयकारों से गूंज उठेगी वैभारगिरि पर्वत

Nalanda : प्रथम सोमवारी को वैभारगिरि पर्वत की चोटी पर स्थित बाबा सोमनाथ सिद्धनाथ महादेव मंदिर में जलाभिषेक के दौरान शिव शंभू के जयकारों से पंच पहाड़ियां गूंज उठेंगी। श्रावणी माह के प्रथम सोमवारी का इंतजार शिव भक्त बड़ी बेसब्री से करते हैं। मठ और मंदिरों की आध्यात्मिक नगरी राजगीर के वैभारगिरि पर्वत पर स्थित बाबा सोमनाथ सिद्धनाथ महादेव मंदिर के प्रति शिवभक्तों में महान आस्था का केंद्र है। सावन महीने में यहां की बात ही निराली है। जहां तक शिव भक्तों का तांता लगा रहता है। जो संपूर्ण भारत वर्ष के शिव स्थलों में परम सिद्ध क्षेत्र माना जाता है। प्रधान पुजारी श्रवण उपाध्याय ने बताया कि इस मंदिर का महत्व बाबा नगरी देवघर से कम नहीं। जहां श्रावणी माह में देवघर से जलाभिषेक कर शिवभक्तों का जत्था यहां भी पहुंचते हैं।

Nalanda : आज प्रथम सोमवारी को बाबा सोमनाथ सिद्धनाथ की जयकारों से गूंज उठेगी वैभारगिरि पर्वत

देश के अन्य राज्यों के अलावे नेपाल से भी पहुंचते हैं शिवभक्तों की टोली बिहार व झारखंड के अलावे देश के अन्य राज्यों सहित नेपाल में इस मंदिर की ख्याति लगभग 15 सालों से बढ़ी है। जहां से शिवभक्तों की टोली यहां आस्था के साथ पहुंचते हैं। जिसमें यहां पटना, नवादा, मुंगेर, भागलपुर व जहानाबाद के अलावे उत्तरी बिहार के दरभंगा, सीतामढ़ी, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, बेतिया, बेगुसराय, सहरसा, वैशाली, समस्तीपुर अन्य सुदूरवर्ती इलाकों से श्रावणी माह में शिवभक्त पहुंचते हैं।

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सम्राट जरासंध के पिता ने स्थापित की थी शिवलिग

सम्राट जरासंध के पिता राजा बृहद्रथ ने संतान रत्न की चाह में इस पर्वत पर बाबा सोमनाथ महादेव शिवलिग की स्थापना की थी। जब जरासंध ने राजगद्दी संभाली तो पिता के स्थापित इस शिवलिग को मंदिर से आच्छादित किया। जो आज भी विद्यमान है। मान्यता के अनुसार सम्राट जरासंध इसी पर्वत पर स्थित भेलवाडोल तालाब में प्रतिदिन स्नान कर वे शिव की पूजा-अर्चना किया करते थे। महाभारतकाल में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन तथा भीम के साथ ब्राह्माण वेश में द्वंद्वयुद्ध की इच्छा इसी शिवालय के समक्ष जाहिर की थी।

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