ESC

सलाना 12 करोड़ खर्च के बावजूद स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ रहा शहर

• 46 वार्ड में 600 सफाई कर्मियों की तैनाती

• उनके वेतन भुगतान पर खर्च हो रहा साढ़े 6 करोड़

• स्वच्छता रैंकिंग में सुधार के लिए हो रहे प्रयास नगण्य

• प्रमुख जगह पर भी आम दिनों में नहीं दिखती है पूरी स्वच्छता

• शहर के कचरे को डंप करने के लिए नहीं हो सकी है व्यवस्था

• शहर से गुजरने वाली नदियों व नालों का हाल खराब

नालंदा : बिहारशरीफ 2011 में ही नगर निगम बना। तब से यहां हर साल इसकी सफाई व्यवस्था पर करोड़ों खर्च किया जा रहा है। वर्ष 2019 से तो यहां की स्वच्छता पर सलाना 12 करोड़ से अधिक खर्च हो रहा है। बावजूद यह शहर स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ रहा है। अपेक्षित उपलब्धि हासिल नहीं हो पा रही है।

इस शहर के 46 वार्ड की सफाई का जिम्मा यहां के 600 सफाई कर्मियों पर है। यानि एक वार्ड पर औसतन 13 सफाईकर्मी हैं। जो घरों से कचरा का उठाव कर इसे डंप सेंटर तक पहुंचाते हैं। उनके वेतन भुगतान पर ही नगर निगम को हर साल 6 करोड़ 48 लाख रुपए से अधिक की राशि खर्च करनी पड़ती है। इसके अलावा 25 टीपर व 26 ट्रैक्टरों के रख रखाव पर भी सलाना दो करोड़ से अधिक की राशि खर्च होती है।

शहर में नहीं दिखती स्वच्छता

स्वच्छता रैंकिंग में सुधार के लिए किये जा रहे प्रयास नगण्य हैं। अस्पताल चौक जैसे व्यवस्ततम व प्रमुख जगह पर भी आम दिनों में स्वच्छता नहीं दिखती है। शहर के बीच से गुजरने वाली प्रमुख सड़क रांची रोड का भी कमोबेश यही हाल रहता है। शहर में अबतक कचरे को डंप करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो सकी है। फोरलेन निर्माण से पहले देवीसराय से महज 500 मीटर दक्षिण तरफ बाइपास पर ही कचरा फेंका जाता था। वहां सड़क निर्माण हो रहा है। अब तो निचली किला गढ़पर, बबुरबन्ना व अन्य जगहों पर ही कचरा फेंका जाता है। 

डीडीसी आवास के सामने सड़को स्थिति दयनीय : गंदगी से परेशान है मोहल्लेवासी

इसी तरह हालात वार्ड नंबर 18 डीडीसी आवास के निकट भी बना हुआ है। हल्की बारिश होने के बाद हालात बेहद ही गंदगी से और नाले के पानी से भरा होता है। जबकि वही नालंदा हेल्थ क्लब है जहां रोजाना शाम को डीएम एसडीएम आते जाते हैं लेकिन फिर भी उस मार्ग की हालत दयनीय है।

आम नागरिक से लेकर नगर निगम तक संवेदनशील नहीं:

देकुली घाट निवासी प्रमोद कुमार, मुरारी प्रसाद सिंह, शिशिर कुमार, पुल पर निवासी रविरंजन प्रसाद, दवा करोबारी सुधीर कुमार व अन्य ने बताया कि स्वच्छता को लेकर बातें तो की जाती है। एसी रूम में बैठकर इसके लिए नीतियां भी बनायी जाती है। लेकिन, इसे धरातल पर उतार पाने में प्रशासन से लेकर नगर निगम के कर्मी पूरी तरह से फेल हैं। स्वच्छता रैंकिंग के समय थोड़ी बहुत एक्टिविटी बढ़ जाती है। बाद में बस वही हाल हो जाता है। आमलोग भी जागरूक नहीं है।

कहते हैं अधिकारी:

स्वच्छता को लेकर कई योजनाओं पर काम चल रहा है। डंपिंग यार्ड को तैयार किया जा रहा है। रिसाइक्लिंग यूनिट लगाने के लिए 10 एकड़ जमीन की तलाश की जा रही है।

विनय रंजन, सिटी मैनेजर, नगर निगम

Leave a Reply

Your email address will not be published.

ESC