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राखी बाजार में फैशन और महंगाई का बोलबाला

नालंदा : रक्षाबंधन के लिए राखी का बाजार सज गया है। खरीदार भी पहुंचने लगे हैं। दुकानों में हर उम्र के लिए राखियों की ढेर सारी रेंज उतारी गयी हैं। पिछले साल से इसबार प्राय: राखियों की कीमत में 10 फीसद तक का इजाफा हो गया है। कुल मिलाकर बाजार में फैशन और महंगाई का बोलबाला है।

बच्चों के लिए बेन-टेन, छोटा भीम, डोरीमॉन, मिक्की मॉस तो युवाओं के लिए एडी स्टोन, मोती और कई डिजाइनदार राखियां बाजारों में उतारी गयी हैं। खास यह भी कि युवाओं को लुभाने के लिए राखियों को हु-ब-हु ब्रेशलेट का लुक दिया गया है। हालांकि, इसकी कीमत 150 से 200 रुपए तक है। अस्पताल चौराह के दुकानदार बबलू कुमार और शशिभूषण प्रसाद बताते हैं कि शहर के बाजारों में राखियों की खेप कोलकाता और दिल्ली से आती है। बदलते ट्रेंड के साथ राखियों में फैशन का पुट बहुत ज्यादा हुआ है। यही कारण है कि कीमत में भी लम्बी उछाल आयी है। अमूमन बाजार में अच्छी क्वालिटी की राखियों की कीमत 50 से 300 रुपए तक है। जबकि, बच्चों वाली राखियां 15 से 20 रुपए तक में मिलती है। भैंसासुर के दुकानदार प्रवीण कुमार कहते हैं कि स्टोन वाली राखियों की मांग सबसे ज्यादा है।

रक्षाबंधन पर कई नक्षत्रों का शुभ मिलन हो रहा है। सौभाग्य योग, धाता योग, अभिजीत योग और खासकर पंचक महायोग में इसबार राखी का त्योहार मनेगा।

ज्योतिष के जानकार पंडित मोहन कुमार दत्त मिश्र कहते हैं कि इसबार दो दिन पूर्णिमा का मान रहने से लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है। परंतु, भद्रा का त्याग करके ही। निर्णय सिंधु के अनुसार हवाले से वे बताते हैं कि पूर्णिमा को दो भागों में बांटा गया है। पहला व्रताय पूर्णिया और दूसरा स्नान दान पूर्णिमा। श्रीहनुमान पंचांग, हृषिकेष पंचांग, महावीर पंचांग और अन्नपूर्णा पंचांग के अनुसार 11 अगस्त को सूर्योदय प्रात: 5 बजकर 30 मिनट में हो रहा है। इस दिन पूर्णिमा का मान दिन में 9 बजकर 35 मिनट पर है। परंतु, उसी समय यानि 9.35 दिन में पूर्णिमा के साथ भद्रा का भी प्रारंभ हो रहा है। भद्रा का साया रात्रि 8.25 तक है। व्रत पर्वोत्सव के अनुसार भद्रा में श्रावणी और फाल्गुनी पूर्णिमा वर्जित माना गया है। जबकि, 12 अगस्त को प्रात: सूर्योदय 5 बजकर 31 मिनट पर होगा और पूर्णिमा का मान प्रात: 7 बजकर 17 मिनट तक है। धर्म सिंधु के अनुसार जिस तिथि में सूर्योदय होता है, वही अस्त कहलाता है। अत: पूर्णिमा उदयव्यापिनी 12 अगस्त को मनाना श्रेष्ठकर माना गया है। शास्त्रों के अनसुार भद्रा में भुलकर भी रक्षा सूत्र नहीं बांधना चाहिए। भद्रा शनि की बहन हैं।

रक्षा बांधन का शुभ समय :

प्रात:काल मुहूर्त 5.31 से 7.17 तक

अभिजित मुहूर्त 11.24 से 12.36 तक

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