26 नवंबर को किसान आंदोलन के वर्षगांठ पर सभी जिला एवं प्रखंड मुख्यालयों किसानों का आंदोलन

तेघरा (बेगूसराय) किसान आंदोलन भारत सरकार द्वारा सभी जायज मांगों को पूरा किए जाने तक जारी रहेगा, संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों से आग्रह किया है कि 26 नवंबर को विश्व का ऐतिहासिक आंदोलन की पहली वर्षगांठ पर देश भर में किसानों का जुझारू आंदोलन किया जाए, खासकर बिहार के सभी जिला मुख्यालय तथा प्रखंड मुख्यालयों पर केंद्रीय मुद्दा के साथ-साथ बिहार के मुद्दों को जोड़कर बड़े बड़े आंदोलन आयोजित किया जाए, पुर्व नियोजित योजना के अनुसार 22 नवंबर को लखनऊ में किसान महापंचायत और 29 नवंबर से ट्रैक्टर ट्रॉली के साथ 500 किसानों का अनुशासित ढंग से शांतिपूर्ण संसद मार्च जारी रहेगा, एक ओर जहां मोदी सरकार ने तीन काले कृषि कानूनों को निरस्त करने के अपनी सरकार के फैसले की घोषणा की ,परंतु वह किसानों के लंबित अति आवश्यक अन्य मांगों पर चुप्पी साध ली है , इस आंदोलन में अब तक 675 से अधिक किसान शहीद हो चुके हैं और भारत सरकार ने उन्हें अब तक श्रद्धांजलि तो दूर उनके बलिदान तक को स्वीकार नहीं किया है ,यदि सरकार ने गलती महसूस कर कानून को वापस लिया है, तो इन शहीद किसानों के सम्मान में संसद में श्रद्धांजलि अर्पित किया जाए ,दिल्ली में उनके लिए स्मारक की स्थापना हो, उनके परिजनों को मुआवजा और उनके परिवार के एक साथी को सरकारी नौकरी की घोषणा मोदी जी को करना चाहिए था, इस आंदोलन के दौर में देश भर में सैकड़ों झूठे मुकदमों में हजारों किसानों को फंसाया गया और दर्जनों लोग जेल गए, उन फर्जी मुकदमों को रद्द करने का ऐलान तथा जेल यातना भुगताने बाले किसानों को मुआवजा की घोषणा सरकार को करना चाहिए, देश के किसान वर्षों से सभी कृषि उत्पादों के लिए लाभकारी समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी के लिए संघर्ष करते रहे है! उक्त विचार बिहार राज्य किसान सभा के महासचिव अशोक सिंह की है जिन्होंने मीडिया को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उक्त आशय की जानकारी दी।,इसके लिए देश भर में किसानों द्वारा आंदोलन चलाए जा रहे हैं, किसानों को अपने और आने वाली पीढ़ियों के लिए जिंदगी मौत की लड़ाई में इन कानूनों के खिलाफ आंदोलन के मैदान में उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा , सभी कृषि पैदावार सी-2 के आधार पर लागत का डेढ़ गुना दाम की कानूनी गारंटी की मांग मौजूदा आंदोलन का एक अभिन्न अंग है, इसके साथ ही बिजली बिल विधेयक 2020 को वापस लेने की मांग भी इस आंदोलन का केंद्रीय मुद्दा रहा है, इस पर भारत सरकार मौन है, इससे सरकार की नियत पर शंका पैदा होती है,
लखीमपुर खीरी में निर्ममता पूर्वक किसानों की हत्या के लिए जिम्मेदार अजय मिश्र टेनी को केंद्रीय मंत्रिमंडल से तुरंत बर्खास्त कर जेल में बंद किया जाए।

तेघरा से अशोक कुमार ठाकुर की रिपोर्ट

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