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बॉनफिक्स के नशे की गिरफ्त में मासूम बचपन

• 10 से 15 साल के बच्चे कर रहे हैं सूंघने वाला नशा

• दिमाग पर करता है असर, हो सकती है मौत

नालंदा : जिस उम्र में बच्चे किताब-कॉपी के साथ होने चाहिए, उस उम्र के मासूम बच्चे सूंघने वाले नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। शराब-गांजा के बाद अब बॉनफिक्स, सॉल्यूशन जैसा नशा अपना पैर पसार रहा है। इसकी गिरफ्त में सबसे अधिक मासूम उम्र के बच्चे आ रहे हैं। 10 से 15 साल के बच्चे इसका शिकार हो रहे हैं।

डॉक्टर का कहना है कि यह स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है। यह दिमाग पर असर करता है। कुछ ही समय में इससे मौत भी हो सकती है। इसकी वजह से बच्चों में आपराधिक प्रवृति बढ़ रही है। आज किशोर उम्र के बच्चे चोरी, लूट, छिनतई, बाइक चोरी, साइकिल चोरी करते पकड़े जा रहे हैं। इनका कारण नशा ही बताया जाता है। दुकानदार भी मात्र कुछ रुपयों की खातिर बच्चों को यह बेच रहे हैं। जबकि, 18 साल से कम उम्र वाले बच्चों को यह बेचना मना है।

कैसे करते हैं नशा:

नशे के लिए बॉनफिक्स, साल्यूशन, फेविक्विक, कफ सीरप, विक्स, आयोडेक्स या फिर चिपकाने वाले बांड का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसे प्लास्टिक में या कागज में डालकर पहले रगड़ते हैं। उसके बाद नाक व मुंह से इसे सूंघकर शरीर के अंदर लेते हैं। इस नशे से सोचने-समझने की शक्ति खत्म हो जाती है। शरीर शिथिल पड़ जाता है। नशा करने वाले बच्चे कई-कई घंटों तक एक ही स्थान पर बैठे रहते हैं। किसी से बात भी नहीं करते हैं।

आसानी से है उपलब्ध:

यह नशा किराना दुकान व जेनरल स्टोर्स पर आसानी से उपलब्ध है। 10 से 20 रुपये में मिल जाते हैं। एक ट्यूब से चार से पांच बच्चे पूरी तरह से नशे में डूब जाते हैं। हालांकि, इनपर वैद्यानिक चेतावनी भी रहती है। इसे बच्चों को बेचना मना है। इसपर लिखा रहता है कि सूंघना या इसका सेवन करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। दुकानदार भी बिना कुछ सोचे-समझे कुछ रुपयों की खातिर बच्चों को बेच देते हैं। कई स्थानों पर बच्चों से इसके लिए अधिक रुपये लेने की भी शिकायत मिली है।

दिमाग पर करता है असर:

प्रसिद्ध चिकित्सकों का कहना है कि इस तरह का नशा सीधे दिमाग पर असर करता है। इन सबमें अल्कोहल की मात्रा काफी अधिक होती है। यह तंत्रिका तंत्र पर भी असर करता है। लंबे समय तक इसका इस्तेमाल करने से बच्चे मानसिक रूप से विकलांग और पागल हो सकते हैं। उनकी मौत भी हो सकती है। इसके अलावा किडनी व लिवर जैसे अंग भी बुरी तरह से प्रभावित होते हैं।

स्कूली छात्र भी आ रहें गिरफ्त में:

शुरू में इस नशे का इस्तेमाल गरीब तबके के बच्चे करते थे। कूड़ा उठाने वाले, मजदूरी करने वाले बच्चे इसके शिकार हो रहे थे। उनकी देखा-देखी अब अच्छे घरों के लड़के व स्कूली छात्र भी इनकी गिरफ्त में आ रहे हैं। श्रम कल्याण केन्द्र का मैदान, हिरण्य पर्वत जैसे सार्वजनिक स्थलों पर भी लड़कों को यह नशा करते देखा जा सकता है। इसके अलावा शहर में दर्जनों ऐसे स्थान हैं जहां इस तरह के नशे का धंधा फल-फूल रहा है।

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