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नालंदा में अब गोद सूनी महिलाओं की गोद भरेगा नालंदा मेटरनिटी होम अस्पताल : नालंदा IVF का हुआ उद्घाटन

बिहारशरीफ : अब जल्द ही डॉक्टर्स कालोनी स्थित नालंदा नेत्रालय एंड मैटरनिटी होम अस्पताल उन माताओं की गोद भरेगा, जिनकी सालों से गोद सूनी पड़ी है। इसी कड़ी में शुक्रवार को बिहार की प्रख्यात स्त्री रोग विशेषज्ञ डाक्टर मंजू गीता मिश्रा ने नालंदा आईवीएफ क्लीनिक का उद्घाटन किया। मौके पर सेंटर की संचालिका स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनीति सिन्हा, डॉ. अरविंद कुमार सिन्हा, डॉ. प्रेरणा प्रियदर्शी, डॉ.अभिनव, डॉ.अचला वर्मा एवम डॉ शिवम् सिन्हा मौजूद थे। डॉ. सुनीति सिन्हा ने बताया कि बांझपन पुरुष या महिला प्रजनन प्रणाली से संबंधित एक बीमारी है। इससे पीड़ित होने पर नियमित रूप से 12 महीने या उससे अधिक समय तक असुरक्षित यौन संबंध (Regular unprotected sexual intercourse) बनाने के बाद भी गर्भावस्था नहीं होती है। यहां आईवीएफ चिकित्सा सेवा की शुरआत की गई है। जो दंपत्ति निःसंतानता की समस्या को झेल रहे हैं,

उनके दुख को समझ पाना आसान नहीं है, साथ ही जो दम्पती निःसंतान है और आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण उपचार नहीं करवा पा रहे हैं.वे और भी ज्यादा तनाव में रहते हैं। इन्ही सब को देखते हुए निःसंतान जोड़ों को कम दरों में फर्टिलिटी उपचार उपलब्ध करवाने के लिए हमलोगों ने आईवीएफ क्लीनिक की शुरुआत की है। साथ ही प्रत्येक रविवार को दोपहर 12 से 2 बजे तक निशुल्क परामर्श दिया जायेगा। वही मंजू गीता मिश्रा ने कहा कि आजकल कई कपल्स इनफर्टिलिटी की समस्या और ऐसे कपल्स के लिए आईवीएफ ट्रीटमेंट किसी वरदान से कम नहीं है। जब कोई महिला नैचुरली कंसीव नहीं कर पाती है तो इस स्थिति में आईवीएफ प्रक्रिया की मदद से उन्हें गर्भधारण करवाया जाता है।

डा. सुनीति काफी अनुभवी चिकित्सक है। काफी किफायती दर में मरीजों को सुविधा मिलेगी। मेडिकल साइंस में विकास होने के कारण आज आईवीएफ इलाज का विकल्प हमारे पास उपलब्ध है। इन विट्रो फर्टिलाइजेशन को आम बोलचाल की भाषा में आईवीएफ कहते हैं। आईवीएफ को हिंदी में भ्रूण प्रत्यारोपण कहा जाता है। आईवीएफ एक प्रजनन उपचार है, यह बांझपन से पीड़ित व्यक्ति या जोड़े के लिए एक वरदान है। आईवीएफ के दौरान, स्त्री के अंडे और पुरुष के स्पर्म को लैब में फर्टिलाइज करके भ्रूण का निर्माण किया जाता है। भ्रूण तैयार करने के बाद, उसे महिला के गर्भाशय में रख दिया जाता है। दुनिया भर में लगभग 4 करोड़ 80 लाख कपल्स और 18 करोड़ 6 लाख इंडिविजुअल्स बांझपन से पीड़ित हैं। दुनिया भर में हर वर्ष आईवीएफ के जरिए लगभग 80 लाख शिशु जन्म लेते हैं। आईवीएफ इलाज से जन्मे शिशु को टेस्ट ट्यूब बेबी (Test tube baby in Hindi) कहते हैं। आईवीएप उपचार से बांझ दंपति को संतान का सुख प्राप्त करने में मदद मिलती है।

बांझपन कई कारण
से होता है। IVF से कई लाभ है :

  • गर्भधारण की अधिक संभावना रहती है।
  • गर्भपात का खतरा कम रहता है।
    *सरोगसी के लिए उत्तम विकल्प है।
    *गर्भधारण का समय तय करने की आजादी रहती है।
    *दाता शुक्राणु और अंडे का उपयोग कर सकते हैं।
    *स्वस्थ्य शिशु की संभावना अधिक रहती है।
    *बांझपन का एक सुरक्षित और सफल इलाज है।

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