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शिवहर : कुपोषण के खिलाफ पोषण का अलख जगा रही हैं कुमारी मंजू

-कुपोषण के खिलाफ जन-भागीदारी  सुनिश्चित करने में कुमारी मंजू की है महत्वपूर्ण भूमिका 

शिवहर। 22 सितंबर

राजकीय बुनियादी विद्यालय स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 106 की सेविका कुमारी मंजू कुपोषण के खिलाफ राह को आसान बनाने की दिशा में बेहतर कार्य कर रहीं हैं। कुमारी मंजू अपने पोषण क्षेत्र में बदलाव लाकर पोषण सेवाओं को सुचारू रखने में सफल हुई हैं। गृह भ्रमण के दौरान लाभार्थी महिलाओं, किशोरियों व बच्चों के संपूरक आहार, स्तनपान एवं अन्य महत्वपूर्ण पोषण गतिविधियों पर समुदाय को जागरूक करने में उनकी भूमिका अहम है। निरंतर समुदाय से संपर्क स्थापित करते रहना एवं अपनी जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर रहना वह अपनी जिम्मेदारी समझतीं हैं। जब कोरोना महामारी के कारण आंगनबाड़ी केन्द्र बंद थे, उस समय भी उन्होंने अपने पोषक क्षेत्र में पोषण गतिविधियों को सुचारू रखा। पोषण की अलख जगाना मंजू को अन्य से अलग करता है। उनकी इसी मेहनत और लगन की वजह से जिला प्रशासन द्वारा उन्हें पोषण पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है। 

पोषण के लिये देती हैं उपयोगी संदेश-

कुमारी मंजू कहती हैं कि समुदाय में पोषण को लेकर जागरूकता बढ़ी है। पहले महिलाएं स्तनपान एवं संपूरक आहार की उपयोगिता से परिचित नहीं थी। लेकिन आंगनबाड़ी केन्द्रों को सरकार द्वारा दिए गए आहार निर्देशिका काफी कारगर साबित हो रहे हैं। वह बताती हैं कि वह प्रत्येक महीने बच्चों के वृद्धि निगरानी पोषण ट्रैक पर अपलोड करती हैं। अति कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र ले जाने के लिए अभिभावकों को प्रेरित करती हैं। हर महीने 16 तारीख को अपने सेंटर पर वीएचएसएनडी का आयोजन कराती हैं, जिससे महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच हो सके। अपने पोषण क्षेत्र में गोदभराई व अन्नप्रासन जैसी गतिविधियां तय समय पर करती हैं। कुमारी मंजू लोगों को न केवल पोषण के लिए जागरूक करती हैं, बल्कि महिलाओं, किशोरियों व बच्चों को स्वच्छता के प्रति भी जागरूक करती हैं। 

लोगों की भागीदारी बहुत जरूरी-

कुमारी मंजू ने बताया कि उनके पोषक क्षेत्र में शायद ही कोई ऐसा घर होगा जिस घर में कोई बच्चा आज कुपोषण का शिकार हो। सेविका मंजू बताती हैं कि जब गांव के बच्चों को स्वस्थ देखती हूँ तो उत्साह से भर जाती हूँ और फिर पूरे लगन के साथ अपने अगले कार्य में जुट जाती हूँ। उनका मानना है कि कुपोषण को खत्म करने के लिए लोगों की इसमें भागीदारी बहुत जरूरी है। खासकर पुरुषों की भागीदारी। अब क्षेत्र के पुरुष भी जागरूक हो रहे हैं और पोषण की बात कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जितने अधिक लोग इस मुहिम में शामिल होंगे, कुपोषण को खत्म करना उतना ही आसान हो सकेगा। 

कुपोषण के खिलाफ लड़ी जा रही कारगर लड़ाई- 

जिला प्रोग्राम पदाधिकारी सीमा रहमान ने बताया कि कुमारी मंजू और इनके जैसी सेविकाओं की बदौलत ही जिले में कुपोषण के खिलाफ कारगर लड़ाई लड़ी जा रही है। उन्होंने बताया कि जिले में 76 हजार 161 लाभार्थी बच्चे हैं। जो आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा का लाभ ले रहे हैं। वहीं 4 हजार 681 गर्भवती महिलाएं, जबकि 3 हजार 234 धातृ महिलाओं को भी लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की दर शिवहर में मात्र 37.3 प्रतिशत है, जबकि राज्य में यह दर 63.1 प्रतिशत है। इसी तरह शिवहर में 34.4 प्रतिशत बच्चे नाटापन के शिकार हैं, जबकि राज्य का  दर 42.9 प्रतिशत है। जिले में 83.5 प्रतिशत बच्चे सिर्फ मां का दूध पीते हैं, वहीं पूरे राज्य का प्रतिशत 58.9 है। सीमा रहमान ने कहा कि इन सभी मापदंडों को और बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास जारी है। 

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