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मुजफ्फरपुर : गुल्लक में पुरुष सहेज रहे गर्भवतियों का भविष्य

  • कुपोषण और प्रसवपूर्व तैयारियों में मिल रही मदद
  • प्रसव पूर्व गुल्लक में रोजाना जमा कर रहे पैसे

मुजफ्फरपुर। 22 सितंबर

एक नवाचार जिसका प्रयोग हर घर अपने यहां प्रसव पूर्व तैयारियों के लिए कर रहा है। एक गुल्लक, जिसमें घर के पुरुष अपनी रोजाना की कमाई में से प्रतिदिन कुछ न कुछ अपनी पत्नी, बहन, भाभी के होने वाले प्रसव के लिए इकठ्ठा कर रहा है। इन इकट्ठा पैसों को वह उनके पोषण, स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए खर्च करेगा। सुनने और सुनाने में यह भले ही साधारण सी बात लगती हो पर इसकी महत्ता उस परिवार को भली भांति पता है जिसने इसका उपयोग किया है। आईसीडीएस की डीसी सुषमा सुमन कहती हैं कि पिछले वर्ष इस नवाचार की शुरुआत जिलाधिकारी प्रणव कुमार ने की थी। इस वर्ष भी इसे हम लोगों को अपनाने के लिए कह रहे हैं।

हर घर का हो यह प्रयास-

डीपीओ चांदनी सिंह कहती हैं कि गुल्लक के प्रयोग का प्रयास हर घर में होना चाहिए। अगर हम इसमें हर रोज 10 रुपए भी डालते हैं तो नौ महीने में यह राशि इतनी हो जाती है कि जिससे प्रसव के बाद प्रसूता को पोषण और समुचित उपचार मिल सके। प्रत्येक आंगनबाड़ी में गर्भवती महिलाओं को पहले एएनसी के दौरान ही इस बात के लिए प्रेरित किया जाता है कि वे घर में एक प्रसव पूर्व गुल्लक जरूर रखें। इस बात के लिए पूरे पोषण माह में जागरूकता भी चलायी जा रही है।

बौनेपन में आयी है कमी-

डीपीओ चांदनी सिंह कहती हैं कि जिले के वैसे बच्चे जिनकी उम्र पांच वर्ष से कम है, उनके बौनेपन की दर में कमी आयी है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 4 के अनुसार, जिले में बौनेपन की दर 47.9 प्रतिशत थी जो नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 5 के आंकड़ों में घटकर 42.6 पर आ गयी है। यह परिवर्तन पोषण के प्रति लोगों में जागरुकता की बदौलत ही संभव हुआ है। इसके अलावा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 5 में महिलाओं के बॉडी मास इंडेक्स में 7.8 प्रतिशत की कमी देखी जा सकती है। यह कुछ पैमाने हैं जो इशारा करते हैं कि कहीं न कहीं महिलाओं और बच्चों में पोषण को लेकर जागरूकता बढ़ी है।

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