तेघरा नगर परिषद वार्ड संख्या 7 के लोग नारकीय स्थिति में जीने को मजबूर

तेघरा (बेगूसराय)बिहार सरकार द्वारा तेघरा नगर पंचायत को उत्क्रमित कर तेघरा नगर परिषद बनाया गया। लेकिन पूर्व से चली आ रही विधि व्यवस्था मैं सुधार की अपेक्षा स्थिति और भी बद से बदतर होती जा रही है। चाहे वह जल निकासी की बात हो, जलजमाव की बात हो, सौंदर्यीकरण की बात हो, या रोशनी की बात हो, या सरकारी जमीन की अतिक्रमण की बात हो, या तेघरा अनुमंडल के बाजार में अक्सर जाम होने या विधि व्यवस्था की बात हो। किसी भी स्तर पर कोई भी बदलाव नहीं दिख रहा है। मुख्य पार्षद भी बदले गए। लेकिन जिल्लत भरी व्यवस्था में कोई भी बदलाव संभव नहीं हुआ है। तेघरा नगर परिषद क्षेत्र वार्ड संख्या 7 की स्थिति अभी भी नरकीय बनी हुई है। 6 महीना पहले 8 लाख की लागत से नाला का निर्माण हुआ लेकिन पानी निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण नाला का पानी सड़क पर ही जमा हुआ है। इस रास्ते से आने जाने वाले लोगों के लिए बहुत बड़ी मुसीबत का सवाल खड़ा करता है। मोहल्ले में रह रहे लोग जिल्लत भरी जिंदगी जीने को मजबूर है। जलजमाव से कई तरह की बीमारी फैलने की संभावना बनी हुई है। खासकर दुर्गंध से लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। इस वार्ड के वार्ड पार्षद महबूब आलम है। जबकि पूरे नगर परिषद की सत्ता इनकी बेगम मुख्य पार्षद आसमा खातून की हाथ में है। विधि व्यवस्था में सुधार हो इसके लिए ना तो नगर कार्यपालक पदाधिकारी संज्ञान ले रहे हैं और ना ही मुख्य पार्षद। आने वाले समय में इस व्यवस्था में सुधार नहीं लाया गया तो लोगों को महामारी से ऊपर वाले ही बचा सकते हैं। स्थानीय लोगों ने जिला पदाधिकारी बेगूसराय से मांग किया है कि आने वाले समय में लोग महामारी का शिकार न हो जाए ।कवल इससे पहले सुरक्षात्मक व्यवस्था की गुहार लगाई।

अशोक कुमार की रिपोर्ट

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