दो वर्ष कोरोना के बाद लगे दुर्गा मेला को इंद्रदेव भगवान ने दिया जोरदार झटका : बरसात के पानी में डूबा दुर्गा पूजा मेला

बेगुसराय : दो वर्ष कोरोना के बाद लगे दुर्गा मेला को इंद्रदेव ने जोरदार झटका दिया है। रविवार की शाम वर्षा होने के बाद मंगलवार को सुबह से लगातार हो रही हथिया नक्षत्र की बारिश ने पूरे जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार बारिश होने के कारण एक ओर किसानों की खेत में लगी धान की फसल को भारी क्षति पहुंची है तो दूसरी ओर दुर्गा पूजा में आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहे ग्रामीण और बाजार को जोरदार झटका लगा है। सिर्फ बेगूसराय जिले में बारिश के कारण दस करोड़ से अधिक की क्षति हुई है।

बारिश ने नगर निगम, नगर परिषद और प्रशासन के तैयारी की भी पोल खोल दिया है, ऐसे में नगर क्षेत्र में चुनाव प्रक्रिया में शामिल निवर्तमान जनप्रतिनिधि को जनता के कड़े सवाल से जूझना होगा। लोग सोशल मीडिया पर उनकी खिंचाई कर रहे हैं। मंगलवार को नवमी तिथि से मेला में तीन दिनों तक उमड़ने वाली भीड़ के मद्देनजर दुकानदारों और गरीबों ने कर्ज लेकर कमाई करने के लिए फुटकर दुकानों की बड़ी तैयारी किया था। लेकिन सभी तैयारी पर प्रकृति की बड़ी मार पड़ी है। सुबह में लोगों की भीड़ ने दुर्गा मंदिरों की ओर रुख किया था, लेकिन अचानक ही बारिश शुरू हो जाने के बाद बाजार से लोग गायब हो गए। बेगूसराय जिला मुख्यालय सहित तमाम बाजारों और मेला परिक्षेत्र में प्रशासन की लाख कोशिशों के बावजूद जलजमाव से लोग हैरान-परेशान हैं। वहीं, मिट्टी का खिलौना, प्लास्टिक का खिलौना, लकड़ी का खिलौना, पूजन सामग्री, श्रृंगार प्रसाधन और खाने-पीने के हजारों अस्थाई दुकान विभिन्न मेला में लगाए गए थे, लेकिन सब कुछ बर्बाद हो गया। जिसके कारण अपने कुछ पूंजी की बदौलत छोटा धंधा कर दुर्गा पूजा में कुछ कमाई करने की आशा रखने वाले गरीब लोगों को जोरदार झटका लगा है। बारिश के कारण सब के सब काफी परेशान हैं, इन गरीब परिवार के छोटे-छोटे फुटकर दुकानदार और मजदूर परिवार में दुर्गा पूजा की खुशी मातम में बदल गई है। तमाम गरीबों के परिवार इंद्रदेव से प्रार्थना कर रहे हैं, लेकिन मौसम विभाग का कहना है कि 15 अक्टूबर तक रहने वाला मानसून सक्रिय हो गया है, जिसके कारण 12 अक्टूबर तक बारिश होती रहेगी। मौसम के अचानक हुए इस बदलाव से सिर्फ दुर्गा पूजा की खुशी ही नहीं, बल्कि आगामी दीपावली और छठ भी इन परिवारों के लिए प्रभावित हो गया है। दुर्गा मेला में होने वाली कमाई से इनके घर दीपावली और छठ मनती थी।
गौरतलब हो कि इस वर्ष भगवती दुर्गा का आगमन और प्रस्थान दोनों हाथी पर हुआ है। जिससे जल प्रलय की संभावना है और अभी हथिया नक्षत्र चल रही है। जिसमें मां भगवती के आगमन और प्रस्थान के फलाफल का प्रत्यक्ष प्रमाण दिख गया है। फिलहाल लगातार हो रही बारिश में ग्रामीण जनजीवन से लेकर शहरी तक जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। विभिन्न आकार के सजाए गए पंडाल की ओर देखने वाला भी कोई नहीं है।

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