फसल सहायता योजना की पेंचीदा प्रक्रिया से अधिकांशतः किसान लाभों से वंचित होंगे

तेघरा (बेगूसराय) बिहार सरकार द्वारा फसल सहायता योजना के तहत नष्ट हुई फसल एवं खाली परी खेतों के लिए किसानों को लाभान्वित करने का ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू की गई। लेकिन इसके लिए लक्ष्य के अनुरूप बहुत ही कम संख्या में किसान इस योजना का लाभ ले पाएंगे ऑनलाइन आवेदन के लिए वही किसान आवेदन के पात्र हो सके जिनका ऑनलाइन निबंधन एवं एलपीसी बना हुआ था। खेती मैं लगे अधिकांश किसान जमाबंदी रैयत नहीं है। साथ ही बटाई एवं ठेका पर आधारित किसान भी वंचित रह जाएंगे। मात्र 15 से 20% किसान ही इस योजना के पात्र होंगे । दूसरी ओर नवंबर माह से रबी फसल की बुवाई की प्रक्रिया मध्य में है । तेघरा प्रखंड के कुल 16642 हेक्टेयर रकबा में से कृषि योग्य 8242 हेक्टेयर भूमि है। इसके लिए डीएपी का 50000 पैकेट की आवश्यकता होती है। किसान नेता दिनेश सिंह ने बताया कि । सरकार के द्वारा अनुज्ञप्ति धारी दुकानों में शुद्ध डीएपी की बैक की संख्या कम उपलब्ध करवाई गई है और अधिक संख्या में एनपीके उपलब्ध करवाई गई है।उर्वरक दुकान से किसानों के मांग पर उन्हें पूर्ण रूप से डीएपी उपलब्ध नहीं हो रहा है दुकानदारों द्वारा डीएपी कम ज्यादा संख्या में एनपीके लेने हेतु किसानों को बाध्य किया जाता है। इसके साथ ही किसानों पर दबाव जिंक एवं अन्य उर्वरक की खरीद के लिए जिस पर किसानों को जेब ढीली करनी पड़ती है और दुकानदारों को अधिक मुनाफा होती है इसके लिए प्रखंड स्तर पर भी उर्वरक निगरानी समिति बनी हुई है। पदाधिकारियों एवं समिति को किसानों की इन समस्याओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि। अगस्त माह में गंगा में आई भयानक बाढ़ की विभीषिका से पिढ़ौली से लेकर बारो तक गंगा क्षेत्र के हजारों परिवार प्रभावित हुए थे जिन्हें सरकार के द्वारा बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए 6000 की राशि एवं अनाज देने का प्रावधान था। 4 माह बीत जाने के बावजूद भी 20% बाढ़ पीड़ित परिवार अभी भी लाभ लेने से वंचित है । जो अंचल कार्यालय और बैंक की दफ्तर का चक्कर लगाते लगाते थक चुके हैं। इन तमाम समस्याओं पर विभागीय पहल एवं निगरानी की आवश्यकता है ताकि सही लाभुकों को सरकारी योजना का उचित लाभ उन्हें समय पर मिल सके।

अशोक कुमार ठाकुर की रिपोर्ट

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