gold

झारखंड से ऐसे ही नहीं पहुंच जाएंगे बिहार,घंटों करना होगा इंतजार।

Nawada : झारखंड से बिहार आने वाली गाड़‍ियों की सघन जांच नवादा के रजौली चेकपोस्‍ट पर की जाती है। इस कारण वहां गाड़‍ियों की लंबी कतारें लगी रहती है। शराब जांच के नाम पर यात्री परेशान होते हैं। जंगली इलाके में उनकी रातें गुजर रही हैं।

रजौली चेकपोस्‍ट पर लगी ट्रकों की लंबी कतार

इन दिनों झारखंड से बिहार आने वाले यात्रियों की काफी फजीहत हो रही है। शराब की जांच की वजह से रजौली में चेकपोस्ट पार करने में चार से छह घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में लंबी दूरी तय कर बिहार की सीमा में प्रवेश करने वाले यात्री भूख-प्यास से बिलबिलाते रहते हैं। इसमें महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। लेकिन इन यात्रियों की कोई सुनने वाला नहीं है। वाहनों में शराब की जांच के नाम पर जिले के आलाधिकारी चुप्पी साध तमाशा देख रहे हैं। खामियाजा आम यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।

चेकपोस्‍ट पर चार से पांच घंटे करना पड़ रहा इंतजार

रांची, कोलकाता, धनबाद आदि शहरों से नवादा आने वाले यात्रियों ने बताया कि गुरुवार की शाम सात बजे गाड़ी पकड़ी। शुक्रवार की सुबह चार बजे तक नवादा पहुंच जाना चाहिए था। पर, दिन के 10 बजे तक चेकपोस्ट पर ही अटके पड़े हुए हैं। गौरतलब है कि सूबे में शराबबंदी लागू है। बावजूद हाल के दिनों में राज्य के विभिन्न हिस्सों में जहरीली शराब पीने से कई लोगों की मौत हो गई। जिसके बाद चेकपोस्ट पर शराब की जांच के लिए सख्ती बढ़ा दी गई है। लेकिन सुविधाएं नहीं बढ़ाई गई हैं जिसका खामियाजा आम यात्रियों को उठाना पड़ रहा है। प्रतिदिन जाम का झाम है, यात्री हलकान हैं और अधिकारी मौन हैं।

चेकपोस्‍ट पर नाराजगी जताते लोग।

घने जंगल में यात्रियों की कट रही ठंड की रात

प्रतिदिन जाम के चलते आठ से दस किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार लग रही है। शुक्रवार का हाल यह रहा कि एक तरफ रजौली अनुमंडल कार्यालय तो दूसरी तरफ झारखंड की सीमा में सैंकड़ों वाहन फंसे हुए थे। कोडरमा-रजौली के बीच घाटी है, जो घने जंगल और पहाड़ियों के बीच है। जाम के चलते ठंड के इस मौसम में यात्रियों की रात घने जंगल में कट रही है। ठंडी हवाओं के झोंके खाकर यात्री बीमार पड़ रहे हैं। लेकिन कोई इनकी सुध लेने वाला नहीं है।

खाने-पीने को तरस जाते हैं लोग

कोडरमा घाटी में खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं है। फलस्वरुप लोगों को भूखे-प्यासे रहना पड़ रहा है। दिन के वक्त ठेला-खोमचा वाले राहत प्रदान करते हैं, लेकिन रात में लोगों के पास भूखे-प्यासे रहने के अलावा कोई चारा नहीं है। रास्ते की समस्या से अनजान लोग शासन-प्रशासन को कुव्यवस्था को लेकर कोसते नजर आते हैं। यह एक दिन की नहीं बल्कि हरदिन की समस्या बन गई है। लोगों ने डीएम का ध्यान आकृष्ट कराते हुए समस्या से निदान दिलाने की मांग की है।

घर में इंतजार कर रहा परिवार भी चिंतित

निर्धारित समय पर घर नहीं पहुंचने पर स्वजनों की चिंता बढ़ जाती है। कोडरमा घाटी में किसी भी कंपनी का मोबाइल नेटवर्क काम नहीं करता है। फलस्वरुप उनसे बात भी नहीं हो पाती है। घर में इंतजार कर रहे लोग होनी-अनहोनी को लेकर भगवान को याद करते रहते हैं। चार-पांच घंटे बाद जाम से निकलने के बाद मोबाइल पर बातचीत होने के बाद लोगों के जान में जान आती है।

लोगों का संयम दे रहा जवाब

जाम में घंटों फंसे रहने पर यात्रियों का धैर्य भी जवाब दे रहा है। शुक्रवार को दर्जनों यात्रियों ने चेक प्वाइंट पर पहुंच कर हंगामा किया। सुस्त जांच को लेकर अपना विरोध जताया। हालांकि जांच कर रहे अधिकारियों-कर्मियों को इसकी कोई परवाह नहीं दिखी। बाद में उत्पाद विभाग के इंस्पेक्टर रामप्रीत कुमार ने जांच की मजबूरी का हवाला देकर यात्रियों को शांत कराया।

घंटों जाम के बाद जर्जर सड़क भी मुसीबत

चार से छह घंटों तक जाम में फंसने के बाद यात्रियों के समक्ष जर्जर सड़क भी बड़ी समस्या है। चेकपोस्ट क्रास करते हुए जर्जर सड़क से होकर गुजरना पड़ता है। जिसके चलते चालक धीमी गति में वाहन चलाते हैं और गंतव्य तक पहुंचने में समय लग जाता है। फोरलेन निर्माण के चलते पूरा सड़क वन-वे हो चुका है, जिसके कारण चेक पोस्ट से गाड़ी निकलते ही उन्हें फिर से जाम की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

कई राज्यों को जोड़ती है यह सड़क

रजौली चेकपोस्ट राष्ट्रीय राजमार्ग 31 पर है। यह सड़क काफी महत्वपूर्ण है और कई राज्यों को जोड़ती है। सीधे तौर पर बिहार-झारखंड के अलावा असम को जोड़ती है। इसके अलावा बंगाल और उड़ीसा जाने के लिए यह मार्ग सुलभ है। विभिन्न राज्यों से संपर्क कराने वाली इस पथ पर सफर करना यात्रियों के लिए मुसीबतों भरा है।

जाम से निजात मिलने के उपाय

भारी वाहनों की जांच को स्कैनर की व्यवस्था की जाए। जांच करने वाले ग्राउंड स्टाफ की संख्या बढ़ाई जाए। चेकपोस्ट पर लेन की संख्या बढ़ाई जाए। माल वाहक और यात्री वाहनों के लिए अलग-अलग लेन की व्यवस्था हो। जर्जर सड़क की मरम्मत कराई जाए।

रिपोर्ट : ऋषभ कुमार (रजौली)

Leave a Reply

Vishwa
  1. You cannot copy content of this page
%d bloggers like this: