समय पर रबी फसल की बुवाई पर लगा ग्रहण, हजारों एकड़ भूमि दलदली में तब्दील, दाना पानी के संकट की संभावना ।

तेघड़ा (बेगूसराय) पिछले वर्ष भी प्राकृतिक प्रकोप से किसान उबर नहीं पाया कि इस बार भी हजारों किसानों के लिए बारिश, बाढ़ व लंबे समय से जलजमाव किसानों के लिए आफत बनकर आई।बेमौसम हुई भारी बारिश से खरीफ की फसल की बुवाई तो प्रभावित हुई। ऊपरी हिस्से की भूमि में भी लगी सब्जी एवं अन्य फसल भी नष्ट हुआ। आज आलम यह बना हुआ है की रबी फसल बुवाई का समय लग भग समाप्त होने के कगार पर है जबकि चौर की खेती योग्य हजारों एकड़ भूमि इस बार नदी का रूप धारण किया हुआ था। जो लंबे समय के बाद पानी निकलने की वजह से आज स्थिति यह बनी हुई है कि वह सभी भूमि कीचड़ और दलदली में तब्दील हो चुका है। तेघरा प्रखंड के मुसहरी, मरसैती, गौरा, धनकौल ,बनहारा, फुलवरिया, शोकहारा, किरतौल,चिल्हाय, अंबा, नोनपुर आदि गांव की हजारों एकड़ खेती योग भूमि तैयार होने में अभी भी वक्त लगेगा कृषि विशेषज्ञ का मानना है कि गेहूं बोआई का समय 15 नवंबर से 15 दिसंबर के बीच ही बेहतर माना जाता है। जो वह भी समय हाथ से निकल चुका है। पिछले सीजन के खरीफ फसल छती की राशि किसानों को अब तक प्राप्त नहीं हुआ है । कृषि फसल क्षति की पेचीदा नियम से मुट्ठी भर किसानों को इसका लाभ मिल पाता है। जिसकी वजह से किसानों का आर्थिक स्थिति दयनीय बनी हुई है। दूसरी ओर मंहगी खाद, बीज खरीदने का संकट। वही डीएपी की भारी किल्लत से किसानों को मजबूरन महंगा उर्वरक के रूप में एनपीके खाद लेकर दोहरी शोषण का मार झेलना पड़ता है । इस बार समय पर गेहूं की बुवाई नहीं हो पानी को लेकर किसानों के ऊपर दाना पानी के संकट का बादल छाया हुआ है। गेहूं बुवाई के सीजन समाप्त होने के बाद किसानों द्वारा आनन-फानन में कदो नुमा खेतों को किसी तरह चीर कर खेती करने से एक तो फसल कमजोर होती है दूसरी ओर फसल तैयार होने से पूर्व ही पछुआ हवा फसल को प्रभावित करने के लिए काफी होता है जिससे उपज की संभावना बहुत ही कम होती है इस बार भी गेहूं बुवाई में लागत बहुत अधिक एवं उपज सीमित मात्रा में होने की संभावना को लेकर किसानों के चेहरे पर चिंता की शिकन साफ झलकती है।

अशोक कुमार ठाकुर की रिपोर्ट

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *