सुशासन बाबू कब लीजिएगा हम आशा की सुद -प्रशिक्षकों का भी हाल है बेहाल

Munger : ताजमहल को देखने के लिए देश प्रदेश से लोग आते हैं और उसकी वाहवाही कहते हैं लेकिन ताजमहल को किसने बनाया उसे लोग याद नहीं करते ! यह कहावत सिद्ध हो रहा है स्वास्थ्य कार्यकर्ता आशा एवं उसके प्रशिक्षकों के लिए सरकार यह दावा करती है 80 प्रतिशत लोगों का कोरोना वैक्सीनेशन हो गया मातृ व शिशु मृत्यु दर में कमीया आई है नियमित टीकाकरण में बढ़ोतरी हुई है परिवार नियोजन का डाटा बड़ा है लेकिन इस सबके पीछे जिसने मेहनत किया उसका सुद लेने वाला कोई नहीं है आज भी अपने अधिकार के लिए आंदोलन पर उतरे हुए हैं फिर भी उसका कोई ख्याल करने वाला नहीं है यह हाल है स्वास्थ्य महकमा में कार्य करने वाले आशा कार्यकर्ता और उनके प्रशिक्षकों का! खगड़िया, मुंगेर ,बक्सर, सहरसा, भागलपुर के प्रशिक्षक अजय कुमार, राजीव कुमार, मनोज कुमार ,पंकज कुमार, बृजेश कुमार, नीलम सिन्हा, चंद्र मणि तिवारी, बबीता कुमारी, संगीता कुमारी, सरिता पांडे सहित आशा कार्यकर्ता रेखा कुमारी, पूजा कुमारी, मंजू कुमारी, निर्मला कुमारी, सोनी कुमारी ,सहित सैकड़ों आशा बताती है कि संस्थागत प्रसव में जो बदलाव आया है अस्पताल की स्थिति में जो सुधार आई है स्वास्थ्य व्यवस्था के अधिकांश स्वास्थ संबंधी इंडिकेटर में जो सुधार आया है इस सबके पीछे हम लोगों का महत्वपूर्ण योगदान है बावजूद इसे देखने वाला कोई नहीं है बताते चलें कि एक जिले में 12 सौ के लगभग आशा कार्य कर रही है

इस प्रकार पूरे 38 जिलों में 38,000 लगभग आशा कार्यरत है जिनका शिकायत है कि इसे ना तो समय से मानदेय का भुगतान होता है इनके ऊपर पदाधिकारी हैं जिसे बीसीएम कहा जाता है वह इनके मानदेय भुगतान के दौरान कमीशन की बात करते रहते हैं दिन-रात कार्य करने वाले आशा को आज तक एक निश्चित मानदेय निर्धारित नहीं किया गया और ना ही इनके सुनहरे भविष्य के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से ठोस कदम उठाई गई यही हाल प्रशिक्षण दे रहे प्रशिक्षकों का भी है एक और महंगाई बढ़ती जा रही है वहीं स्वास्थ्य महकमे में काम करने वाले महत्वपूर्ण कड़ी आशा उनके प्रशिक्षक का हाल बेहाल है उनका भविष्य क्या होगा ? सवाल खड़ा है! पूरे बिहार में लगभग 200 आशा ट्रेन है जो 2012 से आशा को प्रशिक्षण देते आ रहे हैं जिनके सामने भविष्य अंधकार होते जा रहा है उनके बच्चे का क्या होगा? उन्हें यह चिंता खाए जा रही है!

मुंगेर से निरंजन कुमार की रिपोर्ट

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