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Tania
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बिहार में परीक्षा का सफर बना अग्निपरीक्षा—परीक्षार्थी बोले : नौकरी चाहिए तो ऐसे ही टूटना पड़ेगा

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Patna : बिहार में सरकारी परीक्षाओं का मतलब सिर्फ प्रश्नों की उत्तर-पुस्तिका भरना नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक सहनशक्ति की चरम परीक्षा देना भी है। राज्य सरकार जहां परीक्षा करवा तो देती है, वहीं परीक्षा केंद्रों का दूर-दूर के जिलों में आवंटन और भारतीय रेल की अव्यवस्थित व्यवस्था मिलकर एक ऐसी स्थिति पैदा कर देते हैं, जिसमें भविष्य के सिपाही मैदान में उतरने से पहले ही थकान, दर्द और अव्यवस्था से जूझते हुए टूट जाते हैं।

बुधवार, 10 दिसंबर को बिहार के कई जिलों में सिपाही भर्ती परीक्षा आयोजित की गई। इसके लिए हजारों परीक्षार्थी अलग-अलग हिस्सों से अपने-अपने परीक्षा केंद्रों की ओर रवाना हुए। लेकिन इस सफर की तस्वीर ने एक बार फिर बिहार की वास्तविकता उजागर कर दी।

पटना जंक्शन का दिल दहला देने वाला दृश्य

बुधवार की शाम राजधानी पटना जंक्शन पर बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस का नज़ारा किसी ट्रेन का नहीं, बल्कि भेड़-बकरी की तरह ठूंसे गए इंसानों की भीड़ जैसा दिखा। जिस ट्रेन में आम दिनों में पटना से राजगीर तक सीटें तक खाली रहती हैं, वही ट्रेन आज परीक्षार्थियों से फटने को तैयार थी।


लोगों के हाथों में एडमिट कार्ड, आंखों में नौकरी का सपना, और शरीर से चिपके बैग के बीच ऐसा लग रहा था मानो ट्रेन में जगह नहीं, बल्कि सांस लेने की भी अनुमति मांगनी पड़ रही हो।

“नौकरी चाहिए तो जानवर की तरह सफर भी करना पड़ेगा” — परीक्षार्थियों का दर्द

कई युवाओं ने कड़वाहट भरी आवाज़ में कहा कि सरकार परीक्षा शुल्क तो 100 रुपये कर सकती है, लेकिन परीक्षा के दिन एक स्पेशल ट्रेन नहीं चला सकती!

वाकई, जिस राज्य में लाखों युवा नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे हों, वहां परीक्षा के दिनों में एक अतिरिक्त ट्रेन तक नहीं दी जाती, यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

दूर जिले में परीक्षा केंद्र, उसके ऊपर रेल की लचर व्यवस्था

एक तरफ युवाओं को परीक्षा देने के लिए सैंकड़ों किलोमीटर दूर भेजा जाता है, वहीं दूसरी तरफ उनसे उम्मीद की जाती है कि वे किसी तरह टूटते-कुचलते पहुंच जाएं। यही वजह है कि कई युवा मानते हैं कि बिहार में रोजगार पाना सिर्फ पढ़ाई की परीक्षा नहीं, बल्कि सहनशक्ति, धैर्य और संघर्ष की कड़ी परीक्षा भी है।

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यह तस्वीर सिर्फ भीड़ नहीं दिखाती—यह बताती है कि बिहार में नौकरी पाने का रास्ता कितना भरा पड़ा है पीड़ा, अव्यवस्था और मजबूरियों से।

RPS

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