बिहारशरीफ: पी.एम.एस. कॉलेज में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर शिक्षकों और कर्मचारियों का आक्रोश खुलकर सामने आया है। कॉलेज के सचिव डॉ. रघुनाथ प्रसाद कच्छवे और प्रभारी प्राचार्य डॉ. बलराम प्रसाद सिंह पर अनुदान वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और पक्षपात के आरोप लगाते हुए सोमवार को अस्पताल चौराहे पर प्रोफेसर डॉ संजय कुमार के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन कर सचिव और प्राचार्य का पुतला दहन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि दोनों की मिलीभगत से करीब ढाई करोड़ रुपये के अनुदान में अनियमितता हुई है। कॉलेज के शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सरकारी अनुदान और सुरक्षा कोष की राशि के वितरण में भारी गड़बड़ी की गई है, जिससे अधिकांश कर्मचारियों में नाराजगी है। कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार आश्वासन के बावजूद सचिव द्वारा आमसभा नहीं बुलाई जा रही है, जिससे मामले की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस संबंध में कुलपति, राज्यपाल (कुलाधिपति) समेत संबंधित अधिकारियों को जांच के लिए आवेदन भी भेजा गया है। प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों ने साफ कहा कि यह आंदोलन सिर्फ भ्रष्टाचार के खिलाफ नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण वितरण के लिए है। शिक्षकों ने कहा कि हम लोग काफी समय से लड़ रहे हैं ताकि सबके साथ न्याय हो। लेकिन अनुदान का बंटवारा बंदरबांट की तरह किया गया है—जो पक्ष में हैं उन्हें ज्यादा, और बाकी 70% शिक्षकों को बहुत कम दिया गया। सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार सिंह ने भी आरोप लगाया कि वरिष्ठ शिक्षकों को नजरअंदाज कर जूनियर कर्मियों को ज्यादा राशि दी गई, जिससे असंतोष और बढ़ गया है। वहीं, केमिस्ट्री विभाग की डॉ. कुमारी प्रियंका सिन्हा ने इसे व्यापक भ्रष्टाचार करार देते हुए कहा कि भविष्य में अनुदान का वितरण सरकारी गाइडलाइन के अनुसार पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निष्पक्ष जांच नहीं हुई और समान रूप से अनुदान वितरण सुनिश्चित नहीं किया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह प्रदर्शन सचिव और प्राचार्य के खिलाफ है। फिलहाल, कॉलेज प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले ने तूल पकड़ लिया है और अब सभी की नजर संभावित जांच और कार्रवाई पर टिकी है।इंग्लिश विभाग के सहायक प्रोफेसर सूर्यकांत वर्मा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई शिक्षकों को उनके हक का 50 से 70 प्रतिशत कम अनुदान मिला, जबकि कुछ अपात्र लोगों को भी राशि दी गई। उन्होंने कहा कि 2007 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को भी भुगतान किया गया, जो नियमों के खिलाफ है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जहां शिक्षकों को 30 से 50 हजार रुपये मिले, वहीं कुछ चपरासियों को डेढ़ लाख रुपये तक दिए गए और उनसे भी राशि वापस ली गई, जो घोर अनियमितता को दर्शाता है। इस आंदोलन में डॉ संजय कुमार, डॉ अनिल कुमार, डॉ प्रियंका कुमारी, समेत सैकड़ों शिक्षक एवं अन्य कर्मचारीगण मौजूद रहें।

