Nalanda : हॉकी भारत का गौरवशाली राष्ट्रीय खेल, जिसने विश्व मंच पर देश का नाम रौशन किया, आज अपने ही घर में पहचान के लिए जूझ रहा है। हमारा खेल इतिहासों का पन्ना है, लेकिन वर्तमान में वह क्रिकेट के चमकते सितारों के पीछे कहीं खोता जा रहा है। राजगीर, बिहार में हो रहे हीरो एशिया कप 2025 में भारत ने चीन को 4-3 से हराकर ताकत का प्रदर्शन किया। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने गोल की हैट्रिक लगाकर मैच का रोमांच चरम पर पहुंचा दिया। लेकिन उनकी मेहनत को जो इनाम मिला वह हैरान कर देने वाला था, 200 US डॉलर यानी महज लगभग 17,000 रुपए! जबकि क्रिकेट के "मैन ऑफ द मैच" की इनामी रकम लाखों में है, हॉकी खिलाड़ियों को अब भी खुद को साबित करने की जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
क्रिकेट के मेगास्टार्स को लाखों करोड़ों, हॉकी के हीरोज को केवल हजार
भारत में क्रिकेट की धूम-धाम ऐसी कि BCCI के पास दुनिया का सबसे अमीर बोर्ड होने का तमगा है, वहीं हॉकी का हाल अब भी विलुप्त होने के कगार पर। खिलाड़ियों को ना मीडिया विज्ञप्ति, ना पुरस्कारों में सम्मान और ना ही आम जनता की पहचान, इससे बड़ा झटका और क्या हो सकता है? यह खेल सिर्फ एक खेल नहीं, देश का गौरव है, पर आज इसे उसी गौरव की जगह पर हक़ीकत की मार खानी पड़ रही है। भारत के लिए हॉकी एक राष्ट्रीय आत्मा की तरह है, लेकिन क्या इसे वह सम्मान मिलेगा जिसकी वह हकदार है? एक धुंधली हुई विरासत को नई चमक देने की जरूरत है, वरना खेल के इनवीरो के सपने अधूरे ही रह जाएंगे। हर भारतीय को इस खेल की शान को बरकरार रखने का संदेश देना होगा और इस धांसू खेल को वह मंच दिलाना होगा, जिसकी वह सच्चाई में हकदार है।

