Nalanda : नालंदा ज़िले से निकली यह खबर किसी क्राइम थ्रिलर से कम नहीं! दो साल के भीतर 422 नाबालिग बच्चों के गुमशुदा होने की दास्तां अब डरावनी तसवीर खींच रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 70% से ज़्यादा 15 साल से छोटी बच्चियां हैं। सवाल यह उठता है कि क्या यह महज़ प्रेम प्रसंग और गुमशुदगी है या इसके पीछे छिपा है मानव तस्करी का संगठित रैकेट?
🔥 चाइल्ड हेल्पलाइन का बड़ा खुलासा
1098 पर दर्ज शिकायतें प्रशासन की पोल खोल रही हैं।
- 2024-25 में 215 बच्चे लापता → 139 लड़कियां
- इस साल अब तक 186 बच्चे लापता → 131 लड़कियां
इनमें प्रेम जाल में फंसाने और बाल दुर्व्यवहार के कई केस भी!
⚠️ पुलिस पर गंभीर इल्ज़ाम
जिन मामलों में अपहरण की धाराएं लगनी चाहिए थीं, वहां पुलिस ने गुमशुदगी लिखकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। जिले का एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग विंग सिर्फ नाम का साबित हो रहा है।
🏚️ होटलों-ढाबों की काली मेहरबानी
स्थानीय होटलों और ढाबों पर भी उंगली उठ रही है। पैसा कमाने की हवस में ये जगहें दिन-दहाड़े लड़के-लड़कियों को ठिकाना देती हैं और यह नेटवर्क तस्करी के गंदे खेल को ताक़त देने का काम कर रहा है।
💔 मासूमियत की मंडी?
प्रेम के झांसे में डाली गई बच्चियां सीधे शहर से बाहर बेचे जाने की कहानियां सुना रही हैं। यह सिर्फ गुमशुदगी नहीं, बल्कि मासूम ज़िंदगियों की तस्करी की रोंगटे खड़े कर देने वाली साजिश मालूम होती है।
🚨 सबसे बड़ा सवाल –
क्या नालंदा पुलिस की ढिलाई ने यहां मासूमियत के कारोबार को खुली छूट दे दी है? कब तक बच्चियों का भविष्य इस कालाबाज़ारी की भेंट चढ़ता रहेगा?

